Thursday, 24 January 2019

Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?

Solar panel के बारे में आपने बहुत बार सुना होगा इस लेख में हम जानेंगे की Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?, एनर्जी हमारे जीवन के लिए कितनी आवश्यक हो गई है एनर्जी के बिना जीवन असंभव सा लगता है क्योंकि हमारे एनर्जी के स्रोत जैसे पेट्रोल डीजल कोयला बहुत ही सीमित है और साथ ही प्रदूषण का मुख्य कारण भी है जिससे हमारी वातावरण पर बहुत गहरा असर होता है जिसके कारण ऐसे स्त्रोतों की तलाश की जा रही है जिससे हमारी एनर्जी की भी पूर्ति हो जाए और पर्यावरण को कोई हानि ना हो जिसमें सूर्य उर्जा का असीम भंडार है जिसकी और रोशनी का उपयोग करके हम इलेक्ट्रिसिटी को बनाया जा सकता है इसके लिए हम सोलर पैनल का उपयोग बहुत ही लाभकारी होगा।

Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?
Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?

सोलर पैनल क्या है? what is solar panel in hindi

सोलर पैनल बहुत छोटे-छोटे सोलर सेल से मिलकर बना होता है जिसे हम फोटोवॉल्टिक सेल कहते हैं जो सूर्य से आने पहले प्रकाश को electricty में बदल देता हैसोलर पैनल के द्वारा प्रकाश को डीसी वोल्टेज में परिवर्तित किया जाता है। यह छोटे-छोटे सेलो से मिलकर सोलर मॉड्यूल बनता है इसे हम सोलर पैनल कहते हैं बहुत सारे सोलर पैनल को मिलाकर photovoltaic array बनाया जाता है और इन arrays को मिलाकर सोलर पावर प्लांट तैयार किया जाता है।

Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?
Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है?

सोलर पैनल कैसे काम  है?

सोलर पैनल में उपयोग होने वाले सोलर सेल सेमीकंडक्टर मैटेरियल के बने होते हैं, यह सेमीकंडक्टर मैटेरियल दो तरह के होते हैं p-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल और n-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल। सोलर सेल की डोपिंग  इस प्रकार  किया गया है कि n-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल, p-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल के ऊपर हो ताकि सूर्य से आने वाली रोशनी n-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल पर पड़े और इलेक्ट्रॉन का बहने  लग जाए, इससे जिससे इलेक्ट्रिसिटी बनाई जा सके।

हम जानते हैं कि p-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल में हॉल की मात्रा अधिक होती है और n-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल इलेक्ट्रॉनों की मात्रा अधिक होती है और इलेक्ट्रॉन के बहने के कारण ही इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है।

सूर्य के प्रकाश में फोटॉन मौजूद होते हैं जो कई छोटे छोटे बंडलो से मिलकर बने होते हैं। जब किसी सोलर पैनल के ऊपर सूर्य का प्रकाश डाला जाता है तो सूर्य का प्रकाश सोलर पैनल के n टाइप वाले भाग जो नीला होता है, उस पर पड़ता है तो n-type सेमीकंडक्टर मैटेरियल वाले भाग में मौजूद इलेक्ट्रॉन का फ्लो होने लगता है, इलेक्ट्रॉनों के बहने के कारण होल उत्पन्न हो जाते हैं इसको पूरा करने के लिए p-type सेमीकंडक्टर मौजूद इलेक्ट्रॉन, n-type सेमीकंडक्टर  मैटेरियल की तरफ बढ़ते हैं, और यह प्रक्रिया बार-बार होती रहती है जिसके कारण बिजली पैदा होती है।

अपने घर में सोलर पैनल कैसे लगवाए

सोलर पैनल घर में लगवाने के लिए आपके घर पर पर्याप्त जगह होना बहुत जरूरी है यदि आप सोलर प्लांट लगवाना चाहते हैं तो यह पूर्णता आप पर निर्भर करता है कि आप कितने लोड का प्लांट अपने घर पर लगवाना चाहते हैं, मार्केट में सोलर पैनल 100 से लेकर लाखों तक में मौजूद है जिनका उपयोग बड़े-बड़े सोलर प्लांट को बनाने में किया जाता है अपने घर में 1 किलो वाट का सोलर प्लांट लगाने के लिए आपको 10,0000 तक का खर्च आ सकता है, कई राज्यों में Renewable energy को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के द्वारा 30 से लेकर 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

सोलर पैनल कितने प्रकार के होते हैं?

सोलर पैनल  3 प्रकार के होते हैं।
  • Mono-crystalline solar panel
  • Poly-crystalline solar panel
  • Thin-film Solar panel

1. Mono-crystalline solar panel

Mono-crystalline solar panel मे उपयोग होने वाले सोलर सेल octagonal shape के होते हैं जो इन सोलर चैनलों इस shape से पहचाना जाता है, यह पैनल काफी महंगे होते हैं और इसके कारण की क्वालिटी भी अच्छी होती है, इसमें एक ही प्रकार के सिलिकॉन का यूज होने के कारण यह Poly-crystalline solar panel से महंगे होते हैं और इनकी एफिशिएंसी भी अधिक होती है।

2. Poly-crystalline solar panel

इस सोलर पैनल को multi-crystalline solar panel भी कहते हैं क्योंकि यह बहुत प्रकार के सिलिकॉन से मिलकर बने होते हैं, यह पैनल Thin-film Solar panel से महंगे और Mono-crystalline solar panel से सस्ते होते है,  पैनलों का यूज़ सबसे अधिक किया जाताा है।

3. Thin-film Solar panel

Mono-crystalline solar panel और Poly-crystalline solar panel के बनने के बाद बचे हुए निम्न क्वालिटी के सिलिकॉन के द्वारा thin-film solar panel को बनाया जाता है, यह सबसे सस्ते सोलर पैनल होते हैं और इनकी एफिशिएंसी भी बहुत कम होती है।

घर में सोलर पैनल लगाकर भी कमा सकते है पैसे

सोलर पैनल को घरों की छतों पर लगा कर इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न कर सकते हैं और अपने घरों में यूज कर सकते हैं और बाकी बची हुई बिजली को आप ग्रेट को सप्लाई कर सकते हैं और बिजली कंपनियों के द्वारा per unit के हिसाब से पैसे का भुगतान किया जा सकता है लेकिन इसके लिए आपको राज्य सरकार को आवेदन करना जरूरी है।

सोलर पैनल के लगवाने के फायदे

  • सोलर पैनल लगवाने के बाद आपके  घर कि बिजली का खर्च कम हो जाताा है।
  • इसके द्वारा बनाई गई बिजली को आप राज्य सरकार को बेचकर पैसे भी कमा सकते हैं।
  • यह प्रदूषण रहित सिस्टम है इसके द्वारा वातावरण को कोई हानि नहीं होती है।
  • इसकी मेंटिनेस कॉस्ट भी बहुत कम होती है लेकिन बैटरी के लिए तीन-चार साल में मेंटेनेंस कराना जरूरी है।
  • सोलर पैनल लगाने के लिए राज्य सरकार आपको सब्सिडी भी प्रदान करती हैं जोकि आपके सोलर पैनल लगवाने की लागत को कम करती है।
  • इसके द्वारा बिजली बनाए जाने के कारण कोयले और नेचुरल गैस की खपत कम होती है जिससे हमारे देश की ग्रोथ होती हैं।

Solar panel system के प्रकार

  • On- grid system
  • Off-grid system

1. On- grid system

इस system में बैटरी की आवश्यकता नहीं होती है  क्योकि इस सिस्टम में grid-tie inverter का उपयोग किया जाता है, यह उन स्थानों के लिए आवश्यक है जहां पर बिजली बहुत कम जाती है क्योंकि इस सिस्टम के लगाने से घर में बिजली उपयोग करने के पश्चात grid को बिजली सप्लाई आसानी से की जा सकती है।

2. Off-grid system

यह सिस्टम उन स्थानों के लिए अत्यधिक आवश्यक है यहां पर बहुत ही अधिक बिजली जाती है क्योंकि इस सिस्टम में grid-tie inverter के स्थान पर OFF-grid inverter का उपयोग किया जाता है इसमें बैटरी का उपयोग किया जाता है ताकि इस सिस्टम से बनी हुई बिजली को बैटरी में स्टोर किया जा सके।

मैं उम्मीद करता हूं कि आपको यह लेख Solar panel क्या है? और यह कैसे काम करता है? के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी जानकारी पसंद आया तो लाइक और शेयर जरूर करें।

थैंक यू

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